Want to know the whole story Watch it in this video. अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर मांग उठने लगी है. जबकि 28 साल पहले मुलायम सिंह यूपी के मुख्यमंत्री थे, कारसेवक अयोध्या में बाबरी मस्जिद की ओर बढ़ते चले जा रहे थे. पुलिस ने हनुमान गढ़ी के पास कारसेवकों पर गोलियां चलाई गईं थीं. पेज पर मालूम चलता है कि इस दिन कारसेवकों पर पुलिस की गोलियां चली थीं. सरकारी काग़ज़ों के मुताबिक़ 17 लोगों की जान गयी थी. हालांकि कहा ये जाता है कि इस दिन 50 से ज़्यादा लोग मारे गए थे. At around 11am, a hindu holyman or sadhu managed to gain control of an armed constabulary bus in which the police were holding detainees The sadhu drove the bus right through the barricades, clearing a way for the others to follow on foot.
On october 30 in 1990, mulayam singh yadav, as up chief minister, gave an order to the police to open fire at karsevaks who had gathered in ayodhya on the call given by the vhp, the rss and the bjp An account of what all happened that day and two days later. अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से लोग खुश हैं। ओम श्री भारती का कहना है कि अब लग रहा है रामराज्य आने वाला है। जैसी अयोध्यावासी की कल्पना थी, वैसे ही राम मंदिर में। राम मंदिर में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा से वह खुश भी हैं, भावुक हैं। वह आज भी गोलीकांड को याद कर रोने लगती हैं। विश्व हिंदू परिषद के आह्वान पर पूरे देश के कार. Ram Mandir: Ayodhya में 1990 में हुए गोलीकांड में Karsevaks पर कैसे बरसाई गईं थीं गोलियां? आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन रहा है। हर तरफ भगवान राम की गूंज सुनाई दे रही है, लेकिन इस भव्य मंदिर के लिए हिंदुओं खासकर कारसेवकों ने अपने सीने पर गोलियाँ खाईं और ‘जय श्रीराम’ बोलकर अयोध्या की पुण्य भूमि पर अपने नश्वर शरीर को त्याग दिया। कारसेवकों को पता था कि उन्हें मृत्यु को वरण करना पड़ सकता है, फिर भी वे पीछे नहीं हटे।.
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